दमोह: स्कूल में धार्मिक दबाव का मामला, फिर अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई

दमोह, मध्य प्रदेश · कार्रवाई — अवैध निर्माण ध्वस्त

एक स्कूल में कथित रूप से ज़बरन धार्मिक प्रथाएँ थोपने की शिकायत के बाद सरकारी, नियामक और न्यायिक कार्रवाई हुई।

मुद्दा

2023 में मध्य प्रदेश के दमोह स्थित गंगा जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल उन आरोपों के बाद जाँच के घेरे में आया कि गैर-मुस्लिम छात्रों को इस्लाम से जुड़ी धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। आरोपों में शामिल थे:

  • हिजाब/स्कार्फ़ पहनना अनिवार्य करना
  • इस्लामी प्रार्थनाओं का पाठ
  • तिलक और कलावा पहनने पर रोक
  • उर्दू की अनिवार्य पढ़ाई/उपयोग
  • अन्य कथित धार्मिक प्रथाएँ

अभियोजन के आरोप बाद में अदालती कार्यवाही में दर्ज हुए। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 2023 के आदेश में ये आरोप दर्ज हैं कि गैर-मुस्लिम छात्रों को स्कार्फ़ पहनने के लिए मजबूर किया जा रहा था और इस्लामी प्रार्थनाएँ पढ़ाई/पढ़वाई जा रही थीं।

शिकायत के बाद क्या हुआ

इस विवाद के बाद स्कूल की आधिकारिक जाँच शुरू हुई। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने दर्ज किया कि उसे 31 मई 2023 को छात्रों पर अनिवार्य हिजाब, इस्लामी प्रार्थनाएँ और उर्दू थोपे जाने के आरोपों से जुड़ी शिकायत मिली। 2 जून को एनसीपीसीआर ने ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की। इसके बाद स्कूल की मान्यता निलंबित हुई और अन्य आधिकारिक कार्यवाहियाँ भी हुईं।

अतिक्रमण का पहलू

इसी दौरान नगरपालिका प्राधिकरणों ने स्कूल के निर्माण की जाँच की। 11 जून 2023 को दमोह नगरपालिका ने नोटिस जारी कर कहा कि स्कूल परिसर में निर्माण नगरपालिका की स्वीकृति के बिना किया गया है और स्कूल को आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। नोटिस में चेतावनी दी गई कि मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम के तहत अनधिकृत निर्माण हटाया/ध्वस्त किया जा सकता है।

13 जून को नगरपालिका प्रशासन ध्वस्तीकरण दल के साथ स्कूल पहुँचा और स्कूल के उस हिस्से/मंज़िल को ध्वस्त किया जिसे उसने अवैध रूप से निर्मित बताया। उस समय की रिपोर्टों ने पुष्टि की कि चौथी मंज़िल बिना अनुमति के बनाई गई थी।

मामले की वर्तमान स्थिति

मामला अभी भी न्यायालय में है। सितंबर 2026 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्कूल से जुड़े चार आरोपियों के विरुद्ध एफ़आईआर रद्द करने से इनकार कर दिया और कहा कि दबाव के आरोपों को सीधे निराधार नहीं माना जा सकता; उनकी जाँच साक्ष्यों के आधार पर होगी।

प्रभाव

यह मामला दिखाता है कि एक शैक्षणिक संस्थान में कथित रूप से ज़बरन धार्मिक प्रथाओं की शिकायत कैसे उस संस्थान के नियामक अनुपालन और निर्माण की आधिकारिक जाँच तक पहुँची। स्कूल को सामना करना पड़ा:

  • आपराधिक कार्यवाही
  • सरकारी जाँच
  • मान्यता निलंबन/रद्द करने की कार्यवाही
  • अनधिकृत निर्माण पर नगरपालिका की कार्रवाई

धार्मिक प्रथाओं से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही अदालत में जारी है; उच्च न्यायालय के सितंबर 2026 के आदेश का अर्थ है कि आरोपों को इस चरण में रद्द करने के बजाय साक्ष्यों पर परखा जाएगा।

सफलता: एक विवादित स्कूल पर सरकारी, नियामक और न्यायिक स्तर पर लगातार जाँच हुई, और नगरपालिका द्वारा चिह्नित अनधिकृत निर्माण ध्वस्त किया गया।

ॐ इदं न मम