मुद्दा
दिल्ली जामा मस्जिद परिसर के आसपास की सार्वजनिक भूमि के बड़े हिस्से पर शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी और उनसे जुड़ी संस्थाओं से संबद्ध ढाँचों और सुविधाओं द्वारा कथित रूप से अवैध कब्ज़ा और व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
हमने इस कब्ज़े के विरुद्ध दो मुकदमे दायर किए हैं, जिनमें निम्नलिखित ढाँचे शामिल हैं:
- एक स्थायी आवासीय ढाँचा
- इमाम अब्दुल्ला बुखारी अस्पताल
- इमाम अब्दुल्ला बुखारी मेडिकल सेंटर
- सशुल्क कार पार्किंग
- ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन
- तीन सार्वजनिक पार्कों पर कब्ज़ा
यह मामला अन्य भूमि के साथ-साथ जामा मस्जिद क्षेत्र में शहर की दीवार (सिटी वॉल) के भीतर स्थित एमसीडी स्वामित्व वाले खसरा नंबर 153 से संबंधित है।
हमने क्या किया
हमने सरकारी रिकॉर्ड, नगर निगम के साइट प्लान, राजस्व दस्तावेज़, तस्वीरें, व्यावसायिक रसीदें और चिकित्सा दस्तावेज़ सहित दस्तावेज़ी साक्ष्य एकत्र किए, और फिर भूमि के सीमांकन तथा कथित अतिक्रमणों पर कार्रवाई की माँग करते हुए दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा।
जब प्रशासनिक कार्रवाई से मामला नहीं सुलझा, तो हमने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया।
अदालत का हस्तक्षेप
ज़िला अदालत ने मामले को आगे बढ़ाया। 17 सितंबर 2026 को अदालत ने सैयद अहमद बुखारी, अस्पताल, मेडिकल सेंटर, पार्किंग ट्रस्ट और संबंधित सरकारी प्राधिकरणों सहित आठ प्रतिवादियों को समन जारी करने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
तीन सार्वजनिक पार्कों से जुड़ा एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) का मामला भी आगे बढ़ रहा है; 25 अगस्त की सुनवाई में अधिकरण ने प्राधिकरणों से संबंधित सामग्री और स्पष्टीकरण माँगा।
प्रभाव
सार्वजनिक संपत्ति पर कथित कब्ज़े और उसके व्यावसायिक उपयोग का मामला दस्तावेज़ीकरण और सरकारी प्रतिवेदनों से आगे बढ़कर औपचारिक न्यायिक कार्यवाही तक पहुँच गया है।
इस पहल का महत्व यह है कि अब कब्ज़ाधारकों और संबंधित सरकारी प्राधिकरणों को अदालत के समक्ष औपचारिक रूप से जवाब देना होगा।