मुद्दा
दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फ़ेज़-II में 'दरगाह पंचपीर' नामक धार्मिक ढाँचा उस भूमि पर था जिसे दिल्ली विकास प्राधिकरण ने डीडीए के स्वामित्व वाली भूमि माना।
सेव इंडिया फ़ाउंडेशन ने 2024 में इस ढाँचे को अनधिकृत अतिक्रमण बताते हुए मामला उठाना शुरू किया।
हमने क्या किया
एक शिकायत पर निर्भर रहने के बजाय, सेव इंडिया फ़ाउंडेशन ने लगभग दो वर्षों तक मामले का पीछा किया, साक्ष्यों की कड़ी तैयार की और बार-बार प्राधिकरणों के समक्ष उठाया। इन शिकायतों के परिणामस्वरूप अंततः आधिकारिक कार्यवाही शुरू हुई।
सरकारी कार्रवाई
8 मई 2024 को डीडीए ने कब्ज़ाधारक को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि डीडीए भूमि पर “परिवर्धन/परिवर्तन द्वारा अनधिकृत अतिक्रमण” है और पूछा गया कि ध्वस्तीकरण का आदेश क्यों न दिया जाए।
राष्ट्र ज्योति द्वारा देखे गए रिकॉर्ड के अनुसार, कब्ज़ाधारक वैध स्वामित्व साबित करने वाले दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सका।
इसके बाद मामला दिल्ली सरकार की धार्मिक समिति के समक्ष रखा गया। 22 नवंबर 2024 की बैठक में समिति ने दर्ज किया कि ढाँचा डीडीए भूमि पर बनाया गया था और पुलिस सहायता के साथ उसे ध्वस्त करने की सिफ़ारिश की। 1 जनवरी 2025 को गृह विभाग ने यह सिफ़ारिश संबंधित प्राधिकरणों को भेजी।
परिणाम
6 मई 2026 को डीडीए ने यह निष्कर्ष निकालने के बाद ढाँचा ध्वस्त किया कि वह डीडीए भूमि पर अनधिकृत अतिक्रमण था। यह रातों-रात की बुलडोज़र कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक दस्तावेज़ी प्रक्रिया का परिणाम थी:
- शिकायत
- डीडीए जाँच
- कारण बताओ नोटिस
- वैध कब्ज़ा साबित करने में विफलता
- धार्मिक समिति की सिफ़ारिश
- सरकारी पत्राचार
- ध्वस्तीकरण
प्रभाव
सरकारी भूमि पर खड़ा एक धार्मिक ढाँचा दो वर्षों के साक्ष्य-आधारित अभियान और आधिकारिक प्रक्रिया के बाद हटाया गया।
सफलता: लगातार दस्तावेज़ीकरण और शिकायतों के परिणामस्वरूप अंततः डीडीए भूमि से एक अनधिकृत ढाँचे को सरकार द्वारा हटाया गया।