मुद्दा
तुर्कमान गेट और रामलीला मैदान के पास फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास का एक बड़ा परिसर उस भूमि तक फैल गया था जिसे सरकारी सर्वेक्षणों ने अतिक्रमित सार्वजनिक भूमि के रूप में चिह्नित किया।
अक्टूबर 2025 के एक संयुक्त सरकारी सर्वेक्षण में लगभग 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमण पाया गया। सर्वेक्षण में चिह्नित:
- एमसीडी की 36,428 वर्ग फुट भूमि, जिस पर बारात घर, निजी डायग्नोस्टिक सेंटर और वाहन पार्किंग सहित व्यावसायिक इकाइयों का कब्ज़ा था
- पीडब्ल्यूडी की 2,512 वर्ग फुट भूमि
- लगभग 7,343 वर्ग फुट क्षेत्र, जिसमें मस्जिद/कब्रिस्तान परिसर है और जिसके स्वामित्व का निर्धारण अलग से होना था
हमने क्या किया
सेव इंडिया फ़ाउंडेशन ने पहले यह मामला प्राधिकरणों के समक्ष उठाया और फिर सरकारी सर्वेक्षण में अतिक्रमण दर्ज होने के बावजूद जारी सरकारी निष्क्रियता को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
याचिका में अनधिकृत ढाँचों को हटाने और सार्वजनिक भूमि की बहाली की माँग की गई।
अदालत का हस्तक्षेप
12 नवंबर 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकारी सर्वेक्षण और सेव इंडिया फ़ाउंडेशन की याचिका के आधार पर प्राधिकरणों को रामलीला मैदान के पास लगभग 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमित भूमि खाली कराने का निर्देश दिया।
परिणाम
7 जनवरी 2026 को एमसीडी ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। इसमें बारात घर/सामुदायिक भवन, दुकानें, डिस्पेंसरी/मेडिकल सेंटर तथा सड़कों और फ़ुटपाथों पर किए गए अन्य अतिक्रमण सहित अनधिकृत ढाँचे हटाए गए। कई स्वतंत्र रिपोर्टों ने पुष्टि की कि मस्जिद को ध्वस्त नहीं किया गया; कार्रवाई केवल अतिक्रमण के रूप में चिह्नित ढाँचों पर की गई।
यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार हुई। इस दौरान झड़पें हुईं, जिनमें पुलिसकर्मी घायल हुए और गिरफ़्तारियाँ की गईं।
प्रभाव
सरकारी सर्वेक्षण में दर्ज एक बड़े सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण पर अंततः अदालत के निर्देश से कार्रवाई हुई और चिह्नित अनधिकृत ढाँचे हटाए गए।
सफलता: निरंतर कानूनी प्रयास से आधिकारिक रूप से दर्ज अतिक्रमण पर अदालत के आदेश से कार्रवाई और ध्वस्तीकरण हुआ।